उर्दू शायरी · ग़ज़ल

de raha tha kahin sada koi

दे रहा था कहीं सदा कोई

دے رہا تھا کہیں سدا کوئی

शायर: Yachana Phansal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दे रहा था कहीं सदा कोई
दूर तक पर नहीं दिखा कोई

सोच कैसे तिरी मोहब्बत में
मार के ख़ुद को भी जिया कोई

इश्क़ भी इस तरह किया तू ने
जैसे दफ़्तर का काम था कोई

उस ने आवाज़ दी नहीं आख़िर
मेरे अंदर ही मर गया कोई

थक गई हूँ मैं याद कर के अब
भूलने का हुनर सिखा कोई

सारी दुनिया में हैरतें भर दे
फिर तमाशा नया दिखा कोई

मुझ में रौशन हुआ ख़ुदा जब से
तब से बुझता चला गया कोई