उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir kya jo phuT phuT ke KHalwat mein roiye

फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइए

پھر کیا جو پھوٹ پھوٹ کے خلوت میں روئیے

शायर: Urfi Aafaqi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर क्या जो फूट फूट के ख़ल्वत में रोइए
यकसर जहान ही को न जब तक डुबोइए

दीवाना-वार नाचिये हँसिए गुलों के साथ
काँटे अगर मिलें तो जिगर में चुभोइए

आँसू जहाँ भी जिस की भी आँखों में देखिए
मोती समझ के रिश्ता-ए-जाँ में पिरोइए

हर सुब्ह इक जज़ीरा-ए-नौ की तलाश में
साहिल से दूर शोरिश-ए-तूफ़ाँ के होइए