उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mile jo muddat ke baad hum tum na tum wo tum the na hum wo hum the

मिले जो मुद्दत के बाद हम तुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

ملے جو مدت کے بعد ہم تم نہ تم وہ تم تھے نہ ہم وہ ہم تھے

शायर: Urfi Aafaqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिले जो मुद्दत के बाद हम तुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे
थे हम भी ख़ामोश तुम भी गुम-सुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

न आँख छलकी न होंट लरज़े न साँस उलझी न दिल ही धड़का
कहाँ वो जज़्बात का तलातुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

न प्यारी प्यारी शिकायतें वो न पहले जैसी इनायतें वो
न गालियाँ वो पुर-अज़-तरन्नुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

ख़मोशियाँ थीं जो दू-ब-दू थीं ख़मोशियाँ थीं जो चार सू थीं
ख़मोशियाँ थीं जो थीं तकल्लुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

वही ज़मीं थी वही फ़लक था वही थीं सुब्हें वही थीं शामें
वही थे ख़ुर्शीद-ओ-माह-ओ-अंजुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

हज़ार सदियों की दूरियाँ थीं जो दश्त-ओ-सहरा सी दरमियाँ थीं
कि इस तरफ़ हम और उस तरफ़ तुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे

रबाब-ए-ग़म फिर उठाओ 'उर्फ़ी' वही ग़ज़ल फिर सुनाओ 'उर्फ़ी'
मिले जो मुद्दत के बाद हम तुम न तुम वो तुम थे न हम वो हम थे