उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir andheron ne raste roke

फिर अँधेरों ने रास्ते रोके

پھر اندھیروں نے راستے روکے

शायर: Ehsan Ali Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर अँधेरों ने रास्ते रोके
फिर नए ख़िज़्र हैं नए धोके

ग़म के मारों की सादगी देखो
माँगते हैं ये हर ख़ुशी रो के

हम कि जूया-ए-आलम-ए-नौ थे
घर को लौटे कहाँ कहाँ हो के

हम से मत पूछ सुब्ह कब होगी
हम ने सदियाँ गँवाई हैं सो के

जुज़ अजल कोई तो सिला मिलता
ज़िंदगी तेरे बोझ को ढो के

ज़हर ज़िंदाँ सलीब याद आए
ज़ेहन में तुख़्म-ए-आगही बो के

बात इंसाँ की क्यूँ सुने 'अहसन'
जो फ़रिश्ता हो वो उसे टोके