उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab to bosida ho chale hain hum

अब तो बोसीदा हो चले हैं हम

اب تو بوسیدہ ہو چلے ہیں ہم

शायर: Ehsan Ali Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तो बोसीदा हो चले हैं हम
टूटने फूटने लगे हैं हम

ज़ख़्म-ए-दिल की कसक छुपाने को
जिस्म पर घाव चाहते हैं हम

अब नहीं फ़िक्र-ए-सूद रंज-ए-ज़ियाँ
ख़्वार होना था हो चुके हैं हम

अब सभी कुछ हमें गवारा है
हाए कितने बदल गए हैं हम

हम से दामन बचा के चलती है
ऐ सबा तुझ को जानते हैं हम

राहबर के बग़ैर ही 'अहसन'
नई राहों पे चल सके हैं हम