उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phaila na yun KHulus ki chadar mere liye

फैला न यूँ ख़ुलूस की चादर मिरे लिए

پھیلا نہ یوں خلوص کی چادر مرے لئے

शायर: Vali Madni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फैला न यूँ ख़ुलूस की चादर मिरे लिए
कल तक था तेरे हाथ में पत्थर मिरे लिए

पलकों पे कुछ हसीन से मोती सजा गया
फिर सूनी सूनी शाम का मंज़र मिरे लिए

दीवार-ओ-दर से उस के टपकती है तिश्नगी
इक दश्त-ए-बे-कराँ है मिरा घर मिरे लिए

ख़ुशबू जो प्यार की मुझे देता था अब वही
रखता है दस्त-ए-नाज़ में ख़ंजर मिरे लिए

ये शब बड़ी तवील है जाऊँ कहाँ 'वली'
अब बंद हो चुके हैं सभी दर मिरे लिए