उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pata mila hai wo tha mera ham-safar bahut der baad ja kar

पता मिला है वो था मेरा हम-सफ़र बहुत देर ब'अद जा कर

پتہ ملا ہے وہ تھا میرا ہم سفر بہت دیر بعد جا کر

शायर: Jafar Shirazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पता मिला है वो था मेरा हम-सफ़र बहुत देर ब'अद जा कर
कहाँ कहाँ से मिली है मुझ को ख़बर बहुत देर ब'अद जा कर

मैं मुद्दतों सक़्फ़-ए-ज़िंदगी पर खड़े खड़े तुम को देख आया
ये तुम भी क्या हो कि आए मुझ को नज़र बहुत देर ब'अद जा कर

मिरी तमन्ना है अब के तुम फिर मिलो तो जी भर के मुस्कुराएँ
कि देखना है ये रौशनी का सफ़र बहुत देर ब'अद जा कर

मुझे बताओ मैं क्यूँ न इस उठती धूल के साथ बैठ जाऊँ
मुझे ख़बर है वो आएगा बाम पर बहुत देर ब'अद जा कर

ख़राब मौसम में हर शजर से लरज़ते पत्तों ने क्या कहा था
कि फूल आने लगे हैं अब शाख़ पर बहुत देर ब'अद जा कर

क़यामतों की तरह गुज़ारेंगे ये मह-ओ-साल हिजरतों के
तमाम होगा जुदाइयों का सफ़र बहुत देर ब'अद जा कर

मिरी ग़ज़ल में जब आए 'जाफ़र' नज़र उन्हें मारके हुनर के
हुए मिरे मो'तरिफ़ सब अहल-ए-नज़र बहुत देर ब'अद जा कर