उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pareshan hai sitamgar hausla gum ho gaya hai

परेशाँ है सितमगर हौसला गुम हो गया है

پریشاں ہے ستم گر حوصلہ گم ہو گیا ہے

शायर: Rafi Sirsivi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

परेशाँ है सितमगर हौसला गुम हो गया है
गुलों में ख़ंजर-ए-दस्त-ए-जफ़ा गुम हो गया है

निहाँ है एक नुक़्ते में निज़ाम-ए-ज़िंदगानी
वजूद-ए-हर्फ़ तो है तर्जुमा गुम हो गया है

चले आओ हमारी ख़ुशबुओं के रास्ते पर
अगर शहर-ए-मोहब्बत का पता गुम हो गया है

ज़मानत में किसी की दे दिया है मुतमइन हैं
जहाज़-आरज़ू उड़ता हुआ गुम हो गया है

अंधेरा हो गया था सहन-ए-सज्दा में हमारे
जबीं से नय्यर-ए-ख़ाक-ए-शिफ़ा गुम हो गया है

क़सीदे हुस्न-ए-यूसुफ़ के जो अब तक पढ़ रहा था
जमाल-ए-अश्क में वो आइना गुम हो गया है

निगाह-ए-चश्म-ए-इरफ़ान-ओ-शुऊ'र-ए-आगही दे
यहाँ हम अक़्ल वालों का ख़ुदा गुम हो गया है

तुम्हारी सरहद-ए-इमकान छूने को गया था
हमारा ताइर-ए-फ़िक्र-ए-रसा गुम हो गया है