उर्दू शायरी · ग़ज़ल

parde mein KHamushi ke suKHan bolne lage

पर्दे में ख़ामुशी के सुख़न बोलने लगे

پردے میں خامشی کے سخن بولنے لگے

शायर: Tabassum Azmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पर्दे में ख़ामुशी के सुख़न बोलने लगे
काटी गई ज़बाँ तो नयन बोलने लगे

क़ातिल तो मुतमइन था ठिकाने लगा के लाश
काफ़ूर चीख़ उट्ठे कफ़न बोलने लगे

अहल-ए-चमन ने खो दी बसीरत तो यूँ हुआ
गुलशन के सारे ज़ाग़-ओ-ज़ग़न बोलने लगे

यूँ भी हुआ है लाख मुखोटों के बावजूद
सब आव-ताव चाल-चलन बोलने लगे

जब तान ली है रात ने ख़ामोशी की रिदा
जुगनू सितारे चाँद गगन बोलने लगे

बज़्म-ए-तसव्वुरात में माज़ी का रक़्स था
यादों के घुंघरू छना छन बोलने लगे

अशआ'र में यूँ ढालिए तस्वीर-ए-काएनात
जादू-बयाँ क़लम रहे फ़न बोलने लगे