उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle atlas mein jo malbus kiye jate hain

पहले अतलस में जो मल्बूस किए जाते हैं

پہلے اطلس میں جو ملبوس کیے جاتے ہیں

शायर: Fahmida Mosarrat Ahmad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले अतलस में जो मल्बूस किए जाते हैं
फिर वो ऐवानों में महबूस किए जाते हैं

मैं उन्हें हीता-ए-तहरीर में लाऊँ कैसे
दर्द लिक्खे नहीं महसूस किए जाते हैं

बाल-ओ-पर काट के दें इज़्न-ए-रिहाई क्यूँ-कर
उन परिंदों को जो मानूस किए जाते हैं

इतनी आसान नहीं होती है ये राह-ए-सुख़न
पार इस में कई क़ामूस किए जाते हैं

इन पे तो आप ही झुक जाती है रब की रहमत
जो भी इस दुनिया से मायूस किए जाते हैं

क्यों न हों ज़ेर-ओ-ज़बर तख़्त-ए-'मसर्रत' उन के
रक़्स जब साया-ए-ताऊस किए जाते हैं