उर्दू शायरी · ग़ज़ल

paDi jab kisi ki nigah-e-mohabbat

पड़ी जब किसी की निगाह-ए-मोहब्बत

پڑی جب کسی کی نگاہ محبت

शायर: Vafa Barahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पड़ी जब किसी की निगाह-ए-मोहब्बत
मिली अहल-ए-उल्फ़त को राह-ए-मोहब्बत

सितम है क़यामत है आह-ए-मोहब्बत
मिरी सम्त होगी निगाह-ए-मोहब्बत

हज़ारों हसीं जम्अ आ कर हुए हैं
ये महशर है या जल्वा-गाह-ए-मोहब्बत

वो अहल-ए-तमन्ना को पहचान लेंगे
कि छुपती नहीं है निगाह-ए-मोहब्बत

'वफ़ा' इस से वाक़िफ़ नहीं वो सितमगर
ग़ज़ब ढाएगी मेरी आह-ए-मोहब्बत