उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pagal patthar dekh raha hai

पागल पत्थर देख रहा है

پاگل پتھر دیکھ رہا ہے

शायर: Kaif Ahmed Kaifi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पागल पत्थर देख रहा है
शीशे का घर देख रहा है

कौन है तेरा किस का आख़िर
रस्ता दिन भर देख रहा है

पिघला देगा सूरज उस को
मोम का लश्कर देख रहा है

आँखों वाला काली शब में
सुब्ह का मंज़र देख रहा है

बस्ती बस्ती आग लगी है
और समुंदर देख रहा है

मेज़ पे रक्खी फ़ाइल में वो
अपना मुक़द्दर देख रहा है