उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaina-dar-aina TuTa hua

आइना-दर-आइना टूटा हुआ

آئنہ در آئنہ ٹوٹا ہوا

शायर: Kaif Ahmed Kaifi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आइना-दर-आइना टूटा हुआ
देखता हूँ ख़ुद को मैं बिखरा हुआ

वक़्त के सूरज ने काला कर दिया
फूल सा चेहरा था जो हँसता हुआ

हर क़दम ख़ामोश चुप साधे हुए
हर गली का रास्ता सहमा हुआ

लोग नंगे रक़्स में मसरूफ़ थे
वक़्त का तूफ़ान था ठहरा हुआ

सो रहे थे लोग चादर तान के
जो हुआ 'कैफ़ी' यहाँ अच्छा हुआ