उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pa kam nahin tere paiman se bhare hue hum

प कम नहीं तिरे पैमान से भरे हुए हम

پہ کم نہیں ترے پیمان سے بھرے ہوئے ہم

शायर: Osaama ameer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प कम नहीं तिरे पैमान से भरे हुए हम
कि सुब्ह-ओ-शाम दिल-ओ-जान से भरे हुए हम

तिरी गली नहीं आते तो फिर कहाँ जाते
शिकस्तगी में भी इम्कान से भरे हुए हम

यही शु'ऊर वदी’अत है उन निगाहों से
बहुत है कुफ़्र प ईमान से भरे हुए हम

रवाँ है तह में हमारे हमारी ख़ामोशी
नज़र जो आते हैं तूफ़ान से भरे हुए हम

हर एक पहर कोई ख़्वाहिश-ए-रमीदा है
हज़ार तरह के हैजान से भरे हुए हम

शि'आर रखते हैं हर रंग-ओ-आइने के लिए
सुख़न की ज़ैल में एहसान से भरे हुए हम

दिखा रही है ब-तदरीज हैरतें क्या क्या
किसी की सूरत-ए-अंजान से भरे हुए हम