उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin nahin ye mera aks ho nahin sakta

नहीं नहीं ये मिरा अक्स हो नहीं सकता

نہیں نہیں یہ مرا عکس ہو نہیں سکتا

शायर: Babar Rehman Shah3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं नहीं ये मिरा अक्स हो नहीं सकता
किसी के सामने में यूँ तो रो नहीं सकता

थकन से चूर है सारा वजूद अब मेरा
मैं बोझ इतने ग़मों का तो ढो नहीं सकता

तुझे ग़ज़ल तो सुनाता हूँ आज 'बाबर' की
मगर मैं अश्कों से दामन भिगो नहीं सकता