उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin hai ashk se ye KHun-e-nab aankhon mein

नहीं है अश्क से ये ख़ून-ए-नाब आँखों में

نہیں ہے اشک سے یہ خون ناب آنکھوں میں

शायर: Baqar Agah Vellori6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं है अश्क से ये ख़ून-ए-नाब आँखों में
भरा है रंग से तेरे शहाब आँखों में

कहाँ निकल सके आँसू नज़र को जाए नहीं
रखा हूँ शक्ल को तेरी मैं दाब आँखों में

उलूही किस की तजल्ली से हो गया हूँ दो-चार
झमक रहा है सदा माहताब आँखों में

हुए हैं जब से वो कैफ़-ए-निगह के आइना-दार
बजाए अश्क भरी है शराब आँखों में

अमल से अपनी ज़बाँ किस तरह न हो बे-कार
जहाँ हो रस्म सवाल-ओ-जवाब आँखों में

हुआ हूँ जब से मैं इतलाक़ उस के से आगाह
जहाँ मैं देखूँ है वाँ बू-तुराब आँखों में