उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ko le ji ko ab lubhate ho

दिल को ले जी को अब लुभाते हो

دل کو لے جی کو اب لبھاتے ہو

शायर: Baqar Agah Vellori5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल को ले जी को अब लुभाते हो
इस लिए बन बना के आते हो

इश्क़ बिन हम तो कुछ गुनह न किया
बे-गुनाहों को क्यूँ सताते हो

कोई ऐसा मोआ'मला न सुना
न तो आते हो ना बुलाते हो

बावजूद इस जफ़ा के प्यारे तुम
किस क़दर मेरे मन को भाते हो

हम तो अव्वल से मस्त हैं 'आगाह'
फिर तराने ये क्यूँ सुनाते हो