उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nafas ki zad pe har ek shola-e-tamanna hai

नफ़स की ज़द पे हर इक शोला-ए-तमन्ना है

نفس کی زد پہ ہر اک شعلۂ تمنا ہے

शायर: Tabish Dehlvi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नफ़स की ज़द पे हर इक शोला-ए-तमन्ना है
हवा के सामने किस का चराग़ जलता है

तिरा विसाल तो किस को नसीब है लेकिन
तिरे फ़िराक़ का आलम भी किस ने देखा है

अभी हैं क़ुर्ब के कुछ और मरहले बाक़ी
कि तुझ को पा के हमें फिर तिरी तमन्ना है