उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nam wo mera pukare ja raha tha main kahan tha

नाम वो मेरा पुकारे जा रहा था मैं कहाँ था

نام وہ میرا پکارے جا رہا تھا میں کہاں تھا

शायर: Ejaz Quraishi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाम वो मेरा पुकारे जा रहा था मैं कहाँ था
हादिसा ये ख़ूबसूरत कब हुआ था मैं कहाँ था

ढूँढता मैं फिर रहा था जिस को सारे शहर भर में
वो तो मेरे रू-ब-रू बैठा हुआ था मैं कहाँ था

मेरी बाज़ी को पलटने के लिए तय्यार थे सब
सामने मेरे ये सब कुछ हो रहा था मैं कहाँ था

आज वा'दे से मुकरता फिर रहा है छुप रहा है
उस ने सब के सामने वा'दा किया था मैं कहाँ था

ग़म भुलाने के लिए सब लोग बैठे थे वहाँ पर
मेरे जैसों के लिए ही मै-कदा था मैं कहाँ था

अब न शायद मिल सकें इक दूसरे से यूँ कभी हम
जाते जाते उस ने मुझ से ये कहा था मैं कहाँ था

मेरा दामन क्यों रहा 'एजाज़' ख़ाली रहमतों से
झोलियाँ अल्लाह सब की भर रहा था मैं कहाँ था