उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na tera hai na mera hai ye hindustan sab ka hai

न तेरा है न मेरा है ये हिंदुस्तान सब का है

نہ تیرا ہے نہ میرا ہے یہ ہندستان سب کا ہے

शायर: Uday Pratap Singh6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न तेरा है न मेरा है ये हिंदुस्तान सब का है
नहीं समझी गई ये बात तो नुक़्सान सब का है

हज़ारों रास्ते ढूँडे गए उस तक पहुँचने के
मगर पहुँचे हुए ये कह गए भगवान सब का है

जो उस में मिल गईं नदियाँ वो दिखलाई नहीं देतीं
महा-सागर बनाने में मगर एहसान सब का है

हक़ीक़त आदमी की खुल गई बस एक झटके में
जो ला-वारिस पड़ा है धूल में सामान सब का है

ज़रा से प्यार को दुनिया की हर झोली तरसती है
मुक़द्दर अपना अपना है मगर अरमान सब का है

'उदय' झूटी कहानी है सभी राजा-ओ-रानी की
जिसे हम वक़्त कहते हैं वही सुलतान सब का है