उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hote nahin ye faisle sikke uchhaal ke

होते नहीं ये फ़ैसले सिक्के उछाल के

ہوتے نہیں یہ فیصلے سکے اچھال کے

शायर: Uday Pratap Singh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

होते नहीं ये फ़ैसले सिक्के उछाल के
दिल का मु'आमला है ज़रा देख-भाल के

मोबाइलों के दौर के 'आशिक़ को क्या पता
रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल के

आँधी उड़ा के ले गई ये और बात है
कहने को हम भी पत्ते थे मज़बूत डाल के

जब प्यार मिल गया तो सभी रत्न मिल गए
अब क्या करेंगे और समुंदर खँगाल के

मतलब-परस्त दुनिया की फ़ितरत न पूछिए
काँटे को फेंक देते हैं काँटा निकाल के