उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mayassar un ke hathon se tujhe ek jam ho jae

मयस्सर उन के हाथों से तुझे इक जाम हो जाए

میسر ان کے ہاتھوں سے تجھے اک جام ہو جائے

शायर: Uday Pratap Singh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मयस्सर उन के हाथों से तुझे इक जाम हो जाए
बहुत मुमकिन है वा'इज़ तू ‘उमर-ख़य्याम' हो जाए

मिज़ाज-ए-'इश्क़ में शामिल हो बेचैनी तो क्या कीजे
मुसाफ़िर को किसी जंगल में जैसे शाम हो जाए

ये मेरी कोर-चश्मी है या ख़ुद्दारी ये तुम जानो
नज़र उस पर नहीं करता जो जल्वा 'आम हो जाए

दिमाग़ों की जगह दिल से जो थोड़ा काम ले लें हम
बहुत आसान हो जाए बड़ा आराम हो जाए

'उदय' दैर-ओ-हरम में बैठ कर ये 'अक़्ल की बातें
कहीं ऐसा न हो काफ़िर तुम्हारा नाम हो जाए