उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na sochna ki zamane se Dar gae hum bhi

न सोचना कि ज़माने से डर गए हम भी

نہ سوچنا کہ زمانے سے ڈر گئے ہم بھی

शायर: A G Josh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न सोचना कि ज़माने से डर गए हम भी
तिरी तलाश में ग़ैरों के घर गए हम भी

चुरा लीं हम से भी उस ख़ुद-परस्त ने आँखें
दिल-ए-हबीब से आख़िर अगर गए हम भी

पसीजा दिल न किसी का हमारे अश्कों से
हर आस्ताँ पे लिए चश्म-ए-तर गए हम भी

जो देखा कलियों को तुझ पर निसार होते हुए
तो रंग बन के फ़ज़ा में बिखर गए हम भी

जब उस की ज़ौक़-ए-नज़र का हुआ बहुत चर्चा
वुफ़ूर-ए-शौक़ से एक दिन सँवर गए हम भी

बहुत से इश्क़ की राहों में पुल-सिरात आए
तुम्हारा नाम लिया और गुज़र गए हम भी

मुहाल था कि हम ऐ 'जोश' ज़िंदा रह सकते
फ़िराक़-ए-यार में इक रोज़ मर गए हम भी