उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na mere pas izzat-e-ramazan

न मिरे पास इज़्ज़त-ए-रमज़ाँ

نہ مرے پاس عزت رمضاں

शायर: Taban Abdul Hai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न मिरे पास इज़्ज़त-ए-रमज़ाँ
न कभू की इबादत-ए-रमज़ाँ

दुश्मन-ए-ऐश का मैं दुश्मन हूँ
गो कि थे फ़र्ज़ हुर्मत-ए-रमज़ाँ

मुझ को मस्जिद से काम नहीं इल्ला
सुनने जाता हूँ रुख़्सत-ए-रमज़ाँ

शैख़ रोता है अपनी रोज़ी को
कि न अज़-बहर-ए-फ़ुर्क़त-ए-रमज़ाँ

कुछ न हासिल हुआ किसी के तईं
ग़ैर फ़ाक़ा बदौलत-ए-रमज़ाँ

ज़ाहिद-ए-ख़ुश्क के तईं देखे
याद आती है सूरत-ए-रमज़ाँ

मेरे हम-मशरबों में आ 'ताबाँ'
रीझते होंगे हज़रत-ए-रमज़ाँ