उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mushkil hai kahna sher ka jaane bhi koi kya

मुश्किल है कहना शे'र का जाने भी कोई क्या

مشکل ہے کہنا شعر کا جانے بھی کوئی کیا

शायर: Vatsal Sharma Vats4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुश्किल है कहना शे'र का जाने भी कोई क्या
बस वाह-वाह मिलती है माने भी कोई क्या

लेते हैं अब बदन को यहाँ दिल के नाम पर
देता है जान दिल के बहाने भी कोई क्या

मजनूँ मिला तो पूछता था दश्त-ए-‘इश्क़ में
अब सुनता वाँ है मेरे फ़साने भी कोई क्या

धंदा है लेन-देन का अब शे'र-ओ-शा'इरी
आता है 'वत्स' मुझ को सुनाने भी कोई क्या