उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghuT-ghuT ke tere ishq mein kitna raha hun main

घुट-घुट के तेरे 'इश्क़ में कितना रहा हूँ मैं

گھٹ گھٹ کے تیرے عشق میں کتنا رہا ہوں میں

शायर: Vatsal Sharma Vats9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घुट-घुट के तेरे 'इश्क़ में कितना रहा हूँ मैं
इतना कि अपने साथ भी तन्हा रहा हूँ मैं

ना-पैदा मैं हयात-ओ-क़ज़ा के भरम सा हूँ
होता रहा हूँ साथ में खोता रहा हूँ मैं

आँखें चराग़-ए-मुफ़्लिसाँ से कम नहीं मिरी
हर अश्क को सँभाल के रोता रहा हूँ मैं

फिर दिल चला न जाए कहीं 'इश्क़-ए-दोस्त में
दुश्मन ही ख़ुद को आप का ठहरा रहा हूँ मैं

दिल में लगे कि तन में लगे आग आग है
ज़िंदा चिता सा 'इश्क़ में जलता रहा हूँ मैं

कहता था मार डालेगा मरना तिरा मुझे
कैसे बताऊँ तुझ को कि जीता रहा हूँ मैं

देता वजह तू काश मुझे तर्क-ए-'इश्क़ की
ज़ुल्म अपने ही ख़याल के सहता रहा हूँ मैं

मैं भागता रहा हूँ हक़ीक़त से 'इश्क़ की
और 'इश्क़ के ख़याल में बैठा रहा हूँ मैं

शे'र-ओ-सुख़न की राह में तन्हाई साथ है
जो भी ये बोलती है सो दोहरा रहा हूँ मैं