उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ka KHayal karne ka kis ko malal hai

दिल का ख़याल करने का किस को मलाल है

دل کا خیال کرنے کا کس کو ملال ہے

शायर: Vatsal Sharma Vats5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल का ख़याल करने का किस को मलाल है
तेरे ख़याली 'इश्क़ का हम से सवाल है

अब जंग के सिवा नहीं आसार हैं कोई
आधा जहाँ निहत्ता है आधा निढाल है

दिल में तमाम रंग थे और होली जल गई
आज आँख से हमारी टपकता गुलाल है

हिज्राँ है 'आशिक़ी की हक़ीक़त सो 'इश्क़ में
'आशिक़ को पुर-फ़िराक़ यहाँ का विसाल है

उस के बदन पे देखी हैं बूँदें पसीने की
क्या चाँदनी पे गिर गया मोती का थाल है