उर्दू शायरी · ग़ज़ल

munh phul se rangin tha wa sari thi us hari

मुँह फूल से रंगीं था व सारी थी उस हरी

منہ پھول سے رنگیں تھا و ساری تھی اس ہری

शायर: Faez Dehlvi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुँह फूल से रंगीं था व सारी थी उस हरी
खतरानी एक देखी मैं पनघट पे ज्यूँ परी

चीरी हैं उस की उर्बसी रम्भा ओ राधिका
प्रभू ने फिर बनाई नहीं वैसी दूसरी

मैं ने कहा कि घर चलेगी मेरे साथ आज
कहने लगी कि हम सूँ न कर बात तू बुरी