उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mumkin hai kahan barson talak shad rahen hum

मुमकिन है कहाँ बरसों तलक शाद रहें हम

ممکن ہے کہاں برسوں تلک شاد رہیں ہم

शायर: Jahangeer Khan Jauhar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुमकिन है कहाँ बरसों तलक शाद रहें हम
दुनिया तो चाहती है कि बर्बाद रहें हम

हम मुहर-ब-लब ज़ुल्म-ओ-सितम पर रहें कब तक
कब तक हदफ़-ए-नावक-ए-बेदाद रहें हम

तारीख़ बदलनी है तो फिर कैसा तरद्दुद
ये बात अलग चंद ही अफ़राद रहें हम

कुछ ऐसा कोई काम करें रू-ए-ज़मीं पर
लोगों को हमेशा के लिए याद रहें हम

मिलना तो बहुत दूर है लेकिन ता-क़यामत
इम्काँ है कि इस मुल्क में आबाद रहें हम

मुस्तक़बिल-ए-इंसाँ का तक़ाज़ा है ये 'जौहर'
कि एक नई नस्ल की बुनियाद रहें हम