उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jah-o-hashmat nahin jalal nahin

जाह-ओ-हशमत नहीं जलाल नहीं

جاہ و حشمت نہیں جلال نہیں

शायर: Jahangeer Khan Jauhar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाह-ओ-हशमत नहीं जलाल नहीं
फिर भी छेड़े कोई मजाल नहीं

इज़्ज़त-ए-नफ़्स सब को प्यारी है
फ़र्द या क़ौम का सवाल नहीं

हाँ वो बेहद हसीं सही लेकिन
बज़्म-ए-आलम में बे-मिसाल नहीं

कैसे शिकवे गिले कि मुद्दत से
हिज्र ही हिज्र है विसाल नहीं

मेरी हस्ती वजूद रखती है
मैं किसी ज़ेहन का ख़याल नहीं

अपने माज़ी पे सिर्फ़ नाज़ करे
इतना गुज़रा हुआ भी हाल नहीं

अपने फ़न के दिखाइए 'जौहर'
शेर कहना कोई कमाल नहीं