उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe do jam dena ye ishaara kar diya do hain

मुझे दो जाम देना ये इशारा कर दिया दो हैं

مجھے دو جام دینا یہ اشارہ کر دیا دو ہیں

शायर: Aarif Dehelwi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे दो जाम देना ये इशारा कर दिया दो हैं
उठा कर उँगलियाँ दो मैं ने साक़ी से कहा दो हैं

अभी भर जाएगा इक एक कर के सारा मय-ख़ाना
अभी तो भीड़ कम है ला पिला दे साक़िया दो हैं

ख़ुदा को मानता है और कोई बुत-परस्ती को
है मंज़िल एक लेकिन रास्ते उस के जुदा दो हैं

नुजूमी ने बताया है बला का सामना मुझ को
शरारत से वो मेरे कान में कहने लगा दो हैं

मरीज़-ए-'इश्क़ हूँ मैं या'नी इक मैं इक मिरा दिल है
नहीं है तीसरा कोई अभी दर्द-आश्ना दो हैं

सर-ए-राह-ए-गुज़र एहसास-ए-तन्हाई हुआ मुझ को
चमक कर मेरी परछाई ने मुझ से कह दिया दो हैं

मुकम्मल फ़र्द-ए-'इस्याँ पेश करनी है क़यामत में
हमारे दोनों काँधों पर नुमाइंदा ख़ुदा दो हैं

इलाही मंज़िल-ए-मक़्सूद पर मैं ख़ैर से पहुँचूँ
बड़ी मुश्किल ये है राह-ए-तलब में रहनुमा दो हैं

किसी ने जब कहा 'आरिफ़' तिरा साथी नहीं कोई
मिरा हम-ज़ाद बोला एक मैं हूँ अब बता दो हैं