उर्दू शायरी · ग़ज़ल

han ye sach hai ki wo har dil mein makin hota hai

हाँ ये सच है कि वो हर दिल में मकीं होता है

ہاں یہ سچ ہے کہ وہ ہر دل میں مکیں ہوتا ہے

शायर: Aarif Dehelwi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाँ ये सच है कि वो हर दिल में मकीं होता है
ये ग़लत है कि वो होता ही नहीं होता है

तेरा ही हुस्न नुमायाँ है हर इक इंसाँ में
हर बशर में तिरे होने का यक़ीन होता है

और बढ़ जाता है कुछ शौक़-ए-तलब रहरौ का
जब मुसाफ़िर कोई मंज़िल के क़रीब होता है

हुस्न क्या चीज़ है नज़रों का फ़रेब-ए-रंगीं
देखिए शौक़ से जिस को वो हसीं होता है

चुपके चुपके जो हुआ करती हैं दिल से बातें
दिल के पर्दे में कोई पर्दा-नशीं होता है

उस के दीदार का हर शख़्स तलबगार न हो
सामने सब के कोई पर्दा नहीं होता है

जैसे मुरझाई हुई सी हो कली गुलशन में
'इश्क़ में ऐसा हर इक क़ल्ब-ए-हज़ीं होता है

मुँह से इक़रार करो हाँ तो कहो बोलो तो
वस्ल का वा'दा इशारों से नहीं होता है

शाह भी हैं इसी दुनिया में गदा भी 'आरिफ़'
कोई साइल तो कोई तख़्त-नशीं होता है