उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujh pas kabhi wo qad-e-shamshad na aaya

मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया

مجھ پاس کبھی وو قد‌ شمشاد نہ آیا

शायर: Faez Dehlvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया
इस घर मने वो दिल-बर-ए-उस्ताद न आया

गुलशन मिरी अँखियाँ में लगे गुलख़न-ए-दोज़ख़
जो सैर को मुझ साथ परी-ज़ाद न आया

साँझ आई दियो दिन बी हुआ फ़िक्र में आख़िर
वो दिल-बर-ए-जादूगर-ओ-सय्याद न आया

आया न हमन पास किया वा'दा-ख़िलाफ़ी
'फ़ाएज़' का कुछ अहवाल मगर याद न आया