उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat zinda rahti hai mohabbat mar nahin sakti

मोहब्बत ज़िंदा रहती है मोहब्बत मर नहीं सकती

محبت زندہ رہتی ہے محبت مر نہیں سکتی

शायर: Qamar Jalalabadi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत ज़िंदा रहती है मोहब्बत मर नहीं सकती
अजी इंसान क्या ये तो ख़ुदा से डर नहीं सकती

ये कह दो मौत से जा कर के इक दीवाना कहता है
मिरी रूह-ए-मोहब्बत मुझ से पहले मर नहीं सकती

चली आ ओ मिरी जान-ए-तमन्ना दिल की महफ़िल में
तू मुझ से दूर हो उल्फ़त गवारा कर नहीं सकती