उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miyan-e-did koi wajh-e-iltifat khule

मियान-ए-दीद कोई वज्ह-ए-इल्तिफ़ात खुले

میان دید کوئی وجہ التفات کھلے

शायर: Osaama ameer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मियान-ए-दीद कोई वज्ह-ए-इल्तिफ़ात खुले
कि उस का बंद-ए-क़बा शब के साथ साथ खुले

हज़ार रम्ज़-ओ-किनाए ब-सूरत-ए-तहरीर
अगर खुले तो किसी बे-हुनर के हाथ खुले

खुला कि 'उम्र-ए-रवाँ है ब-रंग-ए-कैफ़-ओ-सुरूर
वो ख़द्द-ओ-ख़ाल बहुत चाँदनी की रात खुले

वो आँख खुलती है पैहम सो वो खुली ही रहे
कहाँ ये फ़िक्र हमें दहर-ए-बे-सबात खुले

शराब वाक़ि’अतन इर्तिक़ा-ए-अहसन है
सो पी रहे हैं मुसलसल कि ये हयात खुले

किसे शु'ऊर मयस्सर है आश्नाई का
किसे नसीब कि उस पर हमारी ज़ात खुले