उर्दू शायरी · ग़ज़ल

misl-e-gul khil ki ye ghuncha-dahani KHub nahin

मिस्ल-ए-गुल खिल कि ये ग़ुंचा-दहनी ख़ूब नहीं

مثل گل کھل کہ یہ غنچہ دہنی خوب نہیں

शायर: Chandu Lal Bahadur Shadan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिस्ल-ए-गुल खिल कि ये ग़ुंचा-दहनी ख़ूब नहीं
बात कर हम से भी कुछ कम-सुख़नी ख़ूब नहीं

गुल बिखर जाएँगे सुम्बुल की तरह गुलशन में
तेज़ मत चलियो नसीम-ए-चमनी ख़ूब नहीं

लाल-ओ-गौहर से भरा ख़ुद है सरापा तेरा
ख़्वाहिश-ए-ला'ल-ओ-अक़ीक़-ए-यमनी ख़ूब नहीं

पुर-समर शाख़ को है सर का झुकाना अच्छा
छोड़ दे अपने से ये मा-ओ-मनी ख़ूब नहीं

तेरा मुश्ताक़ है 'शादाँ' ये सुना है तू ने
आ मिल अब दिल से कि ये दिल-शिकनी ख़ूब नहीं