उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh se parda na kar parde ka ghar ye bhi to hai

आँख से पर्दा न कर पर्दे का घर ये भी तो है

آنکھ سے پردہ نہ کر پردے کا گھر یہ بھی تو ہے

शायर: Chandu Lal Bahadur Shadan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख से पर्दा न कर पर्दे का घर ये भी तो है
तू तो देखे हम न देखें तुर्फ़ा-तर ये भी तो है

भूल कर देखा तुझे आँखों में है तेरी शबीह
देखता ही क्यों उधर पेश-ए-नज़र ये भी तो है

छुप के उस को देखना चाहें तो देखें किस तरह
देखते देखे न कोई हम को डर ये भी तो है

यूँ सनम हम से सफ़ाई कि नहीं करते कलाम
बात करने में तुम्हारे इक हुनर ये भी तो है

है बहुत मुश्ताक़ 'शादाँ' कब इधर आएगा तू
इस तरफ़ आ जा कि तेरी रहगुज़र ये भी तो है