उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere dagh-e-dil ne rakh di meri kaifiyat badal ke

मिरे दाग़-ए-दिल ने रख दी मिरी कैफ़ियत बदल के

مرے داغ دل نے رکھ دی مری کیفیت بدل کے

शायर: Habeeb Anwar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे दाग़-ए-दिल ने रख दी मिरी कैफ़ियत बदल के
शब-ए-ग़म का कुफ़्र तोड़ा फ़क़त इक दिए ने जल के

न छुआ उसे न देखा कभी आँख भी उठा के
मिरे पास आई दुनिया कई पैरहन बदल के

मिरी ज़िंदगी के हासिल तू कहाँ छुपा हुआ है
तुझे ढूँडते हैं आँसू मिरी आँख से निकल के

तिरे हुस्न-ए-जल्वा-सामाँ को मैं कैसे देख पाता
मिरे सामने खड़े थे ग़म-ओ-यास के धुँदलके

वही आज फन उठाए मिरे सामने खड़े हैं
जो जवाँ हुए हैं 'अनवर' मिरी आस्तीं में पल के