उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi bhi haal mein ruswa nahin hun

किसी भी हाल में रुस्वा नहीं हूँ

کسی بھی حال میں رسوا نہیں ہوں

शायर: Habeeb Anwar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी भी हाल में रुस्वा नहीं हूँ
अभी आँखों से मैं टपका नहीं हूँ

नवाज़िश और अभी थोड़ी नवाज़िश
अभी टूटा हूँ मैं बिखरा नहीं हूँ

हुजूम-ए-दर्द-ओ-ग़म हैं साथ मेरे
मैं तन्हा हो के भी तन्हा नहीं हूँ

मिरे हँसते हुए चेहरे से पूछो
मैं सहता हूँ मगर कहता नहीं हूँ

तिरी आँखों से है उम्मीद बाक़ी
अभी तक होश है बहका नहीं हूँ

सिवाए ख़ालिक़-ए-मुतलक़ के 'अनवर'
किसी के सामने झुकता नहीं हूँ