उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere apne hi nahin sath nibhane wale

मेरे अपने ही नहीं साथ निभाने वाले

میرے اپنے ہی نہیں ساتھ نبھانے والے

शायर: Habeeb Anwar3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे अपने ही नहीं साथ निभाने वाले
कैसे कह दूँ मिरे दुश्मन हैं ज़माने वाले

लोग देखा किए शो'लों का मिज़ाज-ए-हस्ती
हम झुलसते ही रहे हम थे बुझाने वाले

मैं उभरता ही रहा 'अज़्म-ए-जवाँ के हाथों
मिट गए ख़ुद मिरी हस्ती को मिटाने वाले