उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere aage wo surat aa rahi hai

मिरे आगे वो सूरत आ रही है

مرے آگے وہ صورت آ رہی ہے

शायर: Vafa Barahi16 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे आगे वो सूरत आ रही है
निगाह-ए-आरज़ू थर्रा रही है

सदा-ए-ज़िंदगी ये आ रही है
तमन्ना आज़माई जा रही है

तवज्जोह से सुनो तुम नग़्मा-ए-इश्क़
हमारी आरज़ू कुछ गा रही है

ज़रा सहरा-नवर्दी कीजिए फिर
हमें वहशत यही समझा रही है

इलाही हो दिल-ए-बेताब की ख़ैर
किसी की याद फिर तड़पा रही है

बढ़ा जाता है दरमाँ से मिरा दर्द
सदा-ए-दिल ये पैहम आ रही है

रुख़-ए-रंगीं किसी का है नज़र में
बहार-ए-ज़िंदगी इतरा रही है

मशिय्यत नाम है ताक़त का शायद
अबस ग़ैरत तिरी शर्मा रही है

तसव्वुर और फिर लुत्फ़-ए-तसव्वुर
हमें तो नींद इस से आ रही है

निगाह-ए-नाज़ को जुम्बिश तो फिर दो
न जाने क्यों अदा ये भा रही है

हयात-ओ-मौत की इस कश्मकश को
अजल भी देख कर घबरा रही है

सुनाऊँ दास्तान-ए-ज़िंदगी क्या
मुसीबत पर मुसीबत आ रही है

सँभल जाए तबीअत ग़ैर मुमकिन
तमन्ना क्यों इसे बहला रही है

मुबारक हो नवेद-ए-मर्ग तुम को
हमारी बे-कसी ये गा रही है

हवा-ए-रंज की तासीर देखो
मसर्रत की कली कुम्हला रही है

करूँ सैर-ए-बयाबाँ अब 'वफ़ा' मैं
मिरी वहशत मुझे ले जा रही है