उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera mahbub sab ka man haran hai

मिरा महबूब सब का मन हरन है

مرا محبوب سب کا من ہرن ہے

शायर: Faez Dehlvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा महबूब सब का मन हरन है
नज़र कर देख वो आहू नयन है

नहीं अब जग में वैसा और साजन
मुझे सूरत-शनासी बीच फ़न है

सबी दीवाने हैं उस मह-लक़ा के
मगर वो दिल-रुबा जादू नयन है

करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़'
मिरा साजन बहार-ए-अंजुमन है