उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera dil lala-ru ke gham ke rahne ki haweli hai

मिरा दिल लाला-रू के ग़म के रहने की हवेली है

مرا دل لالہ رو کے غم کے رہنے کی حویلی ہے

शायर: Aarifuddin Aajiz4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा दिल लाला-रू के ग़म के रहने की हवेली है
जिगर दाग़ों सें ताऊसी गुलिस्तान-ए-गंधीली है

उछाला गेंद सासर को अगर मंसूर ने हक़ पर
खड़ी हो रू-ब-रू सूली भी क्या ख़ूब उस को झेली है

न समझे कोई कि है मंसूरी का हक़ के कहने में
क़सम हक़ की कि उस के साथ सूली भी अकेली है

कहाँ से क़ाफ़िया ला ला के अपने शे'र में ढाला
है 'आजिज़' दिल में तेरे दाग़ या तूँ शैख़-चिल्ली है