उर्दू शायरी · ग़ज़ल

araq jab us pari ke chehra-e-pur-nur sen Tapke

अरक़ जब उस परी के चेहरा-ए-पुर-नूर सें टपके

عرق جب اوس پری کے چہرۂ پر نور سیں ٹپکے

शायर: Aarifuddin Aajiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अरक़ जब उस परी के चेहरा-ए-पुर-नूर सें टपके
ख़जिल हो गुल से शबनम जियों लहू नासूर सें टपके

मेरी आँखों से ख़ूनीं अश्क यूँ गिरते हैं पलकों पर
लहू सूली के ऊपर जियों सर-ए-मंसूर सें टपके

अगर उस ज़ुल्फ़-मुश्क-आमेज़ सें चीनी में बाल आवे
अजब नें इत्र-ए-अम्बर कासा-ए-फ़ग़्फ़ूर सें टपके

अगर कैफ़-ए-सुख़न मेरा निहाँ हो ताक को पहोंचे
सुराही शाख़ हो जाए शराब अंगूर सें टपके

भरूँ जब आह का दम अपने गुलगूँ-पोश से 'आजिज़'
दम इस्राफ़ील का लोहू हो बाँग-ए-सूर सें टपके