उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere jine ki saza ho jaise

मेरे जीने की सज़ा हो जैसे

میرے جینے کی سزا ہو جیسے

शायर: Aadil Aseer Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे जीने की सज़ा हो जैसे
ज़िंदगी एक ख़ता हो जैसे

दिल के गुलशन से गुज़र जाती है
याद इक बाद-ए-सबा हो जैसे

यूँ ख़यालों में चले आते हो
कोई पाबंद-ए-वफ़ा हो जैसे

याद है तुझ से बिछड़ने का समाँ
शाख़ से फूल जुदा हो जैसे

अपनी बातों पे गुमाँ होता है
तू ने कुछ मुझ से कहा हो जैसे

उस से मिल कर हुआ महसूस 'असीर'
वो मिरे साथ रहा हो जैसे