उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan sharab ka maine gilas dekha hai

जहाँ शराब का मैं ने गिलास देखा है

جہاں شراب کا میں نے گلاس دیکھا ہے

शायर: Aadil Aseer Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ शराब का मैं ने गिलास देखा है
ग़म-ए-हयात तुझे बद-हवास देखा है

जो इंकिसार है मेरा हिजाब-आलूदा
तिरे ग़ुरूर को भी बे-लिबास देखा है

किसी अमीर का कैफ़-ओ-सुरूर याद आया
किसी ग़रीब को जब भी उदास देखा है

हमें फ़रेब दिया है उस आदमी ने ज़रूर
जिसे ज़रा सा भी चेहरा-शनास देखा है

मिरी हयात से वाक़िफ़ नहीं क़लम मेरा
कि शा'इरी ने फ़क़त इक़्तिबास देखा है