उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera ye jism to be-shak yahan hai

मेरा ये जिस्म तो बे-शक यहाँ है

میرا یہ جسم تو بے شک یہاں ہے

शायर: V. C. Rai Naya8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरा ये जिस्म तो बे-शक यहाँ है
मगर दिल तो वहीं है तू जहाँ है

जो राह-ए-ज़ीस्त में हर-सू धुआँ है
उमीदों का ग़ुबार-ए-कारवाँ है

उमीदें बाँध बढ़ आगे अकेले
कि रह जाता यहीं हर कारवाँ है

मिरी मानो तो सीधी राह चलना
इधर खाई उधर अंधा कुआँ है

तिरे सब कष्ट हर आनंद देगा
वो लेता पहले सब का इम्तिहाँ है

ये आँखों की अजब दरिया-दिली है
ख़ुशी हो या कि ग़म आँसू रवाँ है

हँसी में मत उड़ा मेरी कहानी
तिरे जज़्बात हैं मेरी ज़बाँ है

'नया' क्यूँ तेज़ है धड़कन मिरे दिल
वो शायद आज मुझ पे मेहरबाँ है