उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mashaqqat ka KHazana mangta hai

मशक़्क़त का ख़ज़ाना माँगता है

مشقت کا خزانہ مانگتا ہے

शायर: Bakhsh Layalpuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मशक़्क़त का ख़ज़ाना माँगता है
मिरी मेहनत ज़माना माँगता है

हर इक लम्हा दिल-ए-आवारा-फ़ितरत
मसाफ़त का ख़ज़ाना माँगता है

मुक़द्दर से जिसे माँगा था मैं ने
उसे मुझ से ज़माना माँगता है

'अजब पागल है मेरे मन का पंछी
क़फ़स में आशियाना माँगता है

हमीं हर आन हैं आमादा हिजरत
हमारा आब-ओ-दाना माँगता है

सितम ये है कि हम तिश्ना-लबों से
सितमगर आबयाना माँगता है

हमारे शहर का मर्द-ए-सुबुक-सर
कुलाह-ए-ख़ुसरवाना माँगता है

मिरा हर इक मुनाफ़िक़ यार मुझ से
ख़ुलूस-ए-दोस्ताना माँगता है