उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main pahle dil ke liye hausla banata hun

मैं पहले दिल के लिए हौसला बनाता हूँ

میں پہلے دل کے لئے حوصلہ بناتا ہوں

शायर: Yashab Tamanna6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं पहले दिल के लिए हौसला बनाता हूँ
फिर उस के बा'द कोई आसरा बनाता हूँ

मैं बे-मुराद नज़र आ रहा हूँ लोगों को
मैं दूसरों के लिए रास्ता बनाता हूँ

मैं मानता भी नहीं कोई कारसाज़ भी है
मगर ज़मीं पे बहुत से ख़ुदा बनाता हूँ

अगर हिजाब न होता तो सब से कह देता
मैं कैसे हिज्र को लज़्ज़त-फ़ज़ा बनाता हूँ

ज़माने भर के अँधेरों से जंग होती है
मैं रौशनी के लिए जब दिया बनाता हूँ

ये शहर-ए-इश्क़ मिरे वास्ते नया है मियाँ
अब आया हूँ तो कोई सिलसिला बनाता हूँ