उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main anjaan tha jin se aise jazbon ki pahchan hui

मैं अंजान था जिन से ऐसे जज़्बों की पहचान हुई

میں انجان تھا جن سے ایسے جذبوں کی پہچان ہوئی

शायर: Madhav Noor5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं अंजान था जिन से ऐसे जज़्बों की पहचान हुई
'नूर' बना जो क़ौस-ए-क़ुज़ह तो रंगों की पहचान हुई

खोल के आँखें जब भी हक़ीक़त का मैं ने दीदार किया
मुझ को दिलासा देने वाले सपनों की पहचान हुई

मैं सारे आकाश में घूमा पँख थके तो लौट आया
जब आ कर डाली पे बैठा पेड़ों की पहचान हुई

इश्क़ में मिल के खींच रहा है देख लकीरें गालों पर
दुख और काजल के ना-जाएज़ रिश्तों की पहचान हुई

मैं ने अपने रहबर को बस याद किया और मुस्काया
मस्तों की टोली में जब भी पीरों से पहचान हुई